प्रदर्शन पर बैन पर हाई कोर्ट की आपत्ति के बाद अब दिल्ली यूनिवर्सिटी ने प्रदर्शन के लिए इजाजत लेने का निर्देश दिया है। सोमवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी ने नोटिस जारी कर कहा कि स्टूडेंट्स, टीचर्स और कर्मचारियों को कैंपस में किसी भी प्रकार के प्रदर्शन, धरना, रैली या सभा, जुलूस किसी भी आयोजन से पहले सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
प्रॉक्टर की ओर से जारी नए नोटिस में कहा गया है कि निर्देशों का उल्लंघन करने पर आयोजकों और प्रतिभागियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें निष्कासन, बर्खास्तगी से लेकर पुलिस कार्रवाई शामिल है।
क्या था मामला ?
17 फरवरी को दिल्ली यूनिवर्सिटी ने स्टूडेंट्स, टीचर्स और स्टाफ पर कैंपस में किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन पर एक महीने के लिए रोक लगा दी थी। यह मामला हाई कोर्ट गया, जिस पर कोर्ट ने पूरी तरह से बैन के आदेश पर एतराज जताया और कहा कि यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। अब DU ने कोर्ट के नोटिस के बाद नया नोटिस जारी किया है।
यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर प्रो. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि आयोजकों के लिए अनिवार्य होगा कि वे आवेदन की एक हार्ड कॉपी, खुद उपस्थित होकर जमा करें, जिस पर उनके हस्ताक्षर हों और सभी जानकारी शामिल हो। आवेदन को DU के प्रॉक्टर ऑफिस और संबंधित स्थानीय पुलिस अधिकारियों के पास जमा करनी होगी।
आधिकाधिक अनुमति होगी अनिवार्य
आयोजकों को कार्यक्रम से कम से कम 72 घंटे पहले प्रॉक्टर कार्यालय और स्थानीय पुलिस (DCP/SHO) को आवेदन देना होगा और कार्यक्रम के नेचर (प्रोटेस्ट, पब्लिक स्पीच, धरना, रैली वगैरह), अवधि, प्रतिभागियों की संख्या और वक्ताओं की जानकारी भी देनी होगी। यूनिवर्सिटी ने कहा है कि सोशल मीडिया पोस्ट, वॉट्सऐप मैसेज या पोस्टर को आधिकाधिक अनुमति नहीं माना जाएगा। साथ ही, बाहरी लोगों की भागीदारी पर भी पूरा प्रतिबंध लगाया गया है। UGC इक्विटी नियमों को लेकर 13 फरवरी को DU में एक कार्यक्रम के दौरान हुए दो गुटों के बीच हंगामे के बाद प्रदर्शन पर एक महीने की रोक लगा दी गई थी।
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